Khas khabar

प्रतिबंधित संगठन उल्फा के अध्यक्ष अरविंद राजखोवा बांग्लादेश में गिरफ्तार

Tuesday, 29 September 2009

दु:खों की दवा बना बापू का चरखा

अहमदाबाद. आजादी से पहले व आजादी के बाद कई वर्षो तक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के स्वावलंबन के स्वप्न को साकार करने वाला चरखा अब जापानी लोगों के लिए सभी दुखों की कारगर दवा बन गया है। देश में भले ही चरखे को खास तवज्जो न दी जा रही हो, लेकिन जापान के लोग मन की शांति के लिए बापू के चरखे का उपयोग कर रहे हैं।

यही कारण है कि पिछले तीन सालों में देश से सात सौ से अधिक चरखे जापान भेजे गए हैं। औद्योगिक रूप से विकसित जापान में लोग मन की शांति के लिए योग, प्राणायाम व किताबें पढ़ने के अलावा चरखा भी चलाते हैं। पिछले साल ही अहमदाबाद व जयपुर से 200 चरखे जापान भेजे गए थे। इस साल जयपुर से 100 और चरखे जापान भेजे जाएंगे।

गुजरात खादी ग्रामोद्योग मंडल के जरिए जयपुर के व्यापारी ओमप्रकाश श्रीमाली पिछले तीन सालों से जापान में पेटी चरखा भेज रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह जापानियों के लिए मेडिटेशन व स्वस्थ जीवन का माध्यम बन गया है। गांधी आश्रम स्थित सरंजाम कार्यालय के चरखा प्रभारी कोदरभाई परमार ने बताया कि पेटी चरखा पर सूत कातने से मन काम में तल्लीन होता है।

चरखे का इतिहास : पुराने समय में शादी के वक्त महिलाओं के साथ दहेज में धन, पशु व अन्य वस्तुओं के साथ चरखा भी दिया जाता था। वे समूह में चरखा कात कर सूत व रेशम जुटाती थीं व एक-दूसरे से मेल-मिलाप कर लेती थीं। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान देश में पैदा हुए कपास को इंग्लैंड भेज दिया जाता था। वहां से कपड़ा तैयार कर देश में लाकर बेचा जाता था। गांधीजी ने इसके विरोध में लोगों को चरखे पर कपास कातने व स्वदेशी वस्त्र पहनने का आह्वान किया। यहीं से चरखा देश के स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक बन गया।

कौन इस्तेमाल करता है?

जापान में वरिष्ठ नागरिक मन की शांति के लिए पेटी चरखे उपयोग में लेते हैं। चरखे पर सूत कातने के लिए वे रुई की पूनी भी भारत से ही मंगवाते हैं। इससे एक-डेढ़ घंटे तक के लिए उन्हें मन का सुकून मिलता है

Thursday, 24 September 2009

एड्स के ख़िलाफ़ अहम सफलता

वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने एक ऐसा टीका बना लिया है जो एड्स फैलानेवाले वायरस एचआईवी के ख़तरे को तीस प्रतिशत कम कर देगा! थाईलैंड में अपनी इच्छा से आगे आए सोलह हज़ार लोगों पर इस टीके का परीक्षण किया गया है और इस पूरे कार्यक्रम के लिए पैसा अमरीकी सेना की तरफ़ से दिया गया.

एड्स के क्षेत्र में काम करनेवाले कई जानकारों ने इसे एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया है.!एड्स के क्षेत्र में काम करनेवाले कई जानकारों ने इसे एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया है.


पूरी दुनिया में तीन करोड़ तीस लाख लोग एचआईवी से ग्रस्त हैं.अबतक दवाओं से लोगों को कुछ राहत मिली है लेकिन पहली बार एक टीका बना है जो इसे रोक सके.वैसे तो ये टीका फ़ौरन ही दुकानों या अस्पतालों में पहुंच जाएगा ऐसा होता हुआ नहीं दिख रहा लेकिन इतने ज़्यादा लोगों पर पहली बार इस तरह का परीक्षण हुआ है और पहली बार सही मायने में उम्मीद जगी है कि एड्स का एक संपूर्ण टीका बनाया जा सकता है.

यहां तक पहुंचने में भी वैज्ञानिकों को सात साल लगे हैं.

वैसे तो इसकी शब्दावली काफ़ी जटिल है लेकिन आसान ज़ुबान में यही कहा जा सकता है कि ये टीका एचआईवी के संक्रमण के ख़तरे को कम करने में 31.2 प्रतिशत कारगर है! थाईलैंड में हुए एक संवाददाता सम्मेलन में कहा गया कि ये टीका पूरी तरह कारगर तो नहीं है लेकिन सही दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है.

लैंसेट मेडिकल जरनल के संपादक डॉ रिचर्ड हर्टन कि इस टीके की खोज काफ़ी उत्साहजनक है और इससे कुछ शंकाओं के साथ ही सही लेकिन उम्मीद बढ़ती है.

इस टीके से दुनिया भर में चल रहे उन शोधों को भी मदद मिलेगी जहां कोशिशें चल रही हैं एक पूरी तरह से कारगर टीका बनाने की

Friday, 11 September 2009

सर्व शिक्षा में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला

जोधपुर.

सर्व शिक्षा अभियान के जोधपुर स्थित परियोजना कार्यालय में करोड़ों रुपए का घोटाला सामने आया है। केंद्र सरकार से विभिन्न मदों में मिलने वाली राशि को अधिकारियों ने मनमर्जी से न केवल खर्च किया है, बल्कि कागजी फर्म बना कर बिना हिसाब —किताब के जमा कर राशि का दुरुपयोग किया। परियोजना के बैक खातों एवं कैश बुक में भी लाखों का अंतर पाया गया है।

कलेक्टर नवीन महाजन के निर्देश पर अचानक कराई प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है। जांच में करोड़ों रुपए के वारे-न्यारे करने की बात उजागर हुई है। गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर कलेक्टर ने दो दिन पहले जिला परिषद की एसीईओ सुनीता डागा व कलेक्ट्रेट के एकाउंटेंट को इसकी जांच के निर्देश दिए थे। जांच में प्रारंभिक स्तर पर ही अकेले ग्रांट देने के मामले में 31 करोड़ 92 लाख 84 हजार 425 रुपए का घोटाला सामने आया है।

यह राशि कहां और कैसे खर्च की, इसका वर्ष 2004 से लेकर आज तक उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं मिला है। बैंक के छह खातों में से एक एसबीबीजे के खाते व विभाग की खाता बुक में 80 लाख रुपए का अंतर पाया गया है। विभाग के यूको बैंक के खाते में 1 करोड़ 38 लाख 12 हजार 44 रुपए हैं, जबकि कैश बुक के अनुसार खाते में 1 करोड़ 69 लाख 23 हजार 918 रुपए की राशि होनी चाहिए।

सर्व शिक्षा परियोजना में लगे एडीपीसी रघुवीरसिंह राठौड़ को 12 लाख 35 हजार रुपए एडवांस देना पाया गया है। इतनी बड़ी राशि के वाउचर और बिल एक ही दिन में पास करना भी यहां के काम-काज पर सवाल खड़े कर रहा है। वर्तमान एडीपीसी प्रदीप मिश्रा को 1.50 लाख, मनोज पंवार को 2.30 लाख तथा सुमन त्यागी को 80 हजार रुपए एडवांस दिए गए है।

इस राशि के वाउचर और बिल भी लगभग फर्जी प्रतीत हो रहे हैं। सर्व शिक्षा अभियान के तहत बच्चों के लिए चलाए गए क्वालिटी एश्योरेंस प्रोग्राम में एडीपीसी प्रदीप मिश्रा ने 75 हजार एडवांस उठाने के अलावा 47 हजार 256 रुपए के बिल बाद में पेश कर राशि उठा ली।

वर्ष 2004 से लेकर अब तक के टेंडर भी संदिग्ध प्रतीत हो रहे हैं। जिस निर्मला ट्रेडर्स फर्म को राज्य स्तर से ब्लैक लिस्टेड किया गया उसको ठेका देना भी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। जांच मंे मिले अधिकांश बिल, टेंडर व वाउचर कंप्यूटर पर कार्यालय में ही बने प्रतीत हो रहे हैं।

यह बड़ा घोटाला है

प्रारंभिक जांच से लगता है कि यह बड़ा घोटाला है। सरकार से स्पेशल ऑडिट का निवेदन करेंगे। - नवीन महाजन, कलेक्टर

Wednesday, 5 August 2009

सबका ब्लड टेस्ट करने की तैयारी

नई दिल्ली।। डायबीटीज रोकने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। वह पूरी आबादी का ब्लड टेस्ट जरूरी बनाने पर विचार कर रही है। इस योजना को नैशनल रूरल हेल्थ मिशन (एनआरएचएम) के तहत लागू किया जा सकता है, जिसके दायरे में देश की पूरी आबादी होगी। शहरी और ग्रामीण गरीबों पर खास ध्यान होगा। केंदीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद का कहना है कि मैंने डिपार्टमेंट ऑफ रिसर्च से इसकी प्लानिंग करने के लिए कहा है। इस मामले में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप पर विचार किया जा सकता है। डायबीटीज के लक्षणों की जल्द पहचान न होने से लोग इलाज नहीं करा पाते। डायबीटीज के 81 पर्सेंट केस का निदान सिर्फ सावधानी बरत कर किया जा सकता है। खान-पान की आदत में बदलाव, एक्सरसाइज और लाइफस्टाइल चेंज करने से समस्या से निपटा जा सकता है। अगर लोगों को अपने शरीर में ब्लड शुगर की स्थिति के बारे में पता होगा तो वे सावधानी बरत कर कंट्रोल कर सकते हैं। आजाद का कहना है कि इस प्रोजेक्ट में काफी खर्च आएगा। इसके लिए काफी फंड की जरूरत होगी। इसके लिए मैंने बाहरी एजेंसियों और प्राइवेट संस्थाओं से भी संपर्क किया है। एक आदमी पर चिप और सूई का ही खर्च 30 रुपये होगा। टेस्ट के उपकरणों का खर्च अलग होगा। ऐसे में मैं इसे एनआरएचएम से जोड़ना चाहता हूं। इसके लिए श्रम संसाधनों की समस्या नहीं रहेगी। एक्सर्पट्स का कहना है कि डायबीटीज के मामले में भारत दुनिया की राजधानी है। वर्ष 2015 तक यहां करीब 7 करोड़ लोग डायबीटीज से प्रभावित होंगे। अब गांवों में भी डायबीटीज के मामले बढ़ रहे हैं।

Saturday, 4 July 2009

"अब अजमेर से ही गुजरेगी केन्द्र-राज्य की योजनाएं"

अजमेर।
अजमेर को वल्र्ड क्लास यूनिवर्सिटी व वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन मिलने की घोषणा से खासे उत्साहित केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार राज्यमंत्री सचिन पायलट ने ऎलान किया कि भविष्य में केन्द्र और राज्य सरकार की कोई भी योजना अजमेर में होकर ही गुजरेगी। उन्होंने कहा कि वह अजमेर को ऎसे विकसित शहर के रूप में देखना चाहते है जिससे देश के चुनींदा शहरों में इसकी गिनती हो। इसका विकास सुव्यवस्थित हो। इसकी अच्छी शुरूआत हो चुकी है।

दो दिवसीय दौरे पर आए पायलट ने शनिवार को पत्रकारों से कहा कि पिछले दो दशक से शहर विकास के मामले में बिल्कुल पिछड़ गया। अब ऎसा नहीं होगा। रेल बजट में अजमेर को इतना मिला जो कभी नहीं मिला। रेल मंत्री ममता बनर्जी से उन्होंने जो मांगा, वह मिला। वल्र्ड क्लास रेलवे स्टेशन, नई गाडियां व उनके कई प्रस्तावों को रेल मंत्री ने जस का तस मंजूर किया। इससे पहले अजमेर को वल्र्ड क्लास यूनिवर्सिटी की अनुशंसा हो चुकी है। पायलट ने कहा कि अजमेर अब विकास की गाड़ी पकड़ चुका है।

Saturday, 28 March 2009

वेश्याओं ने निकाला अखबार

मुम्बई। यूं तो कमाठीपुरा की गलियां वेश्यावृत्ति के लिए बदनाम हैं लेकिन आजकल कुछ औरतें यहां की खबरें इकट्ठी करती मिल जाती हैं।
कभी वेश्यावृत्ति का काम करने वाली यह औरतें अब रिपोर्टर बन गई हैं। अब वे यहां की सनसनीखेज खबरों को अपने अखबार की संयोजक रूपा को लाकर देती हैं।
वे इस खास तरह के अखबार के एक छोटे से कमरे में काम करती हैं। इस अखबार का नाम है ‘लाल बत्ती दस्तावेज’।
वेश्या से रिपोर्टर बनी एक महिला रीता (बदला हुआ नाम) का कहना है, “हम औरतों से जुड़ी खबरों को इकट्ठा कर यहां लाते हैं।”
सभी खबरों के आने के बाद वे ‘अपने आप’ नामक गैर-सरकारी संगठन के यहां टाइप की जाती हैं। यह संगठन इस छोटे बजट के अखबार को महीने में एक बार छापता है।
अखबार की संयोजक रूपा कहती हैं, “हमारा यह मकसद है कि औरतों के साथ धोखा न हो। उन्हें देह व्यापार से बाहर आकर कुछ अच्छा काम करना चाहिए।”
इस अखबार की खबरों में कमाठीपुरा की गलियों की महिलाओं के स्वास्थ्य से लेकर मानवाधिकार और व्यक्तिगत कहानियां शामिल होती हैं।
इस अखबार को निकालने के पीछे एक पूर्व पत्रकार अनुराग चतुर्वेदी का दिमाग था। वे अब इस अखबार और इनके संवाददाताओं के साथ व्यस्त हो चुके हैं।
चतुर्वेदी ‘अपने आप’ में ट्रस्टी भी हैं। चतुर्वेदी कहते हैं, “इस अखबार का उद्देश्य इन औरतों को आवाज देना है। हम चाहते हैं कि वे ही इस अखबार के रिपोर्टर और सम्पादक भी हों।”
फिलहाल ‘प्रिंट आउट’ के तौर पर बांटे जाने वाले इस अखबार ‘लाल बत्ती दस्तावेज’ ने अब अपने पंजीयन के लिए आवेदन किया है। उम्मीद है जल्द ही यह एक अखबार के रूप में सामने आएगा।

Monday, 23 March 2009

अधूरी पेयजल योजनाओं पर करोड़ों खर्च


जलदाय विभाग में पिछली पांच सालों में विभिन्न पेयजल योजनाओं में पैसा पानी का पैसा पाइपों पर खर्च किया गया जिसके चलते अधिकांश पेयजल योजनाएं अधूरी रह गई। इन पेयजल योजनाओं को पूरा करने के लिए विभाग को अभी करोड़ों रूपए और खर्च करने होंगे।सूत्रों के अनुसार पिछले पांच साल के भाजपा शासन के दौरान विभिन्न योजनाओं के निर्माण में मिलीभगत कर महंगे मैटेलिक पाइपों का उपयोग कर योजनाओं को अनुमानित बजट से कई गुना अधिक खर्चीला बना दिया गया। प्रस्तावित योजनाओं का आधे से ज्यादा यानी 2000 करोड़ का बजट अत्यधिक महंगे मैटेलिक पाइपों की खरीद पर खर्च कर दिया गया। पिछले पांच वर्षाें में विभाग द्वारा केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न पेयजल योजनाओं पर सात करोड़ रूपए से अधिक खर्च करने के बाद भी योजनाएं अधूरी पड़ी हैं। इसके अलावा इन योजनाओं का 700 करोड़ रूपए से अधिक आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान करना बाकी है। इस तरह इन योजनाओं को पूरा करने के लिए विभागन ने अभी करोड़ों रूपए और खर्च करने होंगे। नॉन मैटेलिक पाइप की कीमत लगभग सौ रूपए प्रति मीटर होती है वहीं मैटेलिक पाइप की कीमत एक हजार रूपए प्रति मीटर होती है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि अनावश्यक रूप से योजनाओं को खर्चीला बनाया गया है। विभिन्न पेयजल योजनाओं के लिए राज्य सरकार द्वारा एशियन विकास बैंक से कई करोड़ रूपए ऋण लिया गया जिसको प्रदेश की जनता द्वारा चुकता किया जाएगा, भले ही जनता का पानी मिले या नहीं। जलदाय विभाग प्रदेश की जनता को पानी उपलब्ध कराने के लिए कितना गंभीर है इसका अंदाज इसी से लग सकता है कि हजारों करोड़ खर्च करने के बाद भी उसके द्वारा गर्मी में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों की आपात पेयजल जल योजना बना डाली।